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Old vs New Pension Scheme 2025: सरकारी कर्मचारियों के लिए फायदेमंद होगी?

भारत की पेंशन प्रणालीक्या यह OPS और NPS का सही संतुलन है? पर बहस लगातार जारी है, क्योंकि सरकार ने 2025 में एकीकृत पेंशन योजना (UPS) पेश की है। यह योजना पुरानी पेंशन योजना (OPS) …

भारत की पेंशन प्रणालीक्या यह OPS और NPS का सही संतुलन है? पर बहस लगातार जारी है, क्योंकि सरकार ने 2025 में एकीकृत पेंशन योजना (UPS) पेश की है। यह योजना पुरानी पेंशन योजना (OPS) और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के लाभों को संतुलित करने का प्रयास करती है, ताकि वित्तीय सुरक्षा और स्थिरता से संबंधित चिंताओं का समाधान किया जा सके।

इस लेख में, हम तीनों पेंशन योजनाओं की विशेषताओं और उनके सरकारी कर्मचारियों पर प्रभाव की तुलना करेंगे।

पुरानी पेंशन योजना (OPS) – पारंपरिक मॉडल

पुरानी पेंशन योजना (OPS) एक परिभाषित लाभ योजना थी, जो 1 जनवरी 2004 से पहले सरकारी कर्मचारियों के लिए उपलब्ध थी। इसमें कर्मचारियों को आजीवन पेंशन की गारंटी दी जाती थी, जो आखिरी वेतन के 50% पर आधारित होती थी, और इसके लिए कर्मचारियों को कोई योगदान देने की आवश्यकता नहीं थी।

OPS की मुख्य विशेषताएँ:

  • गारंटीड पेंशन – सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनके आखिरी वेतन का 50% पेंशन के रूप में मिलता था।
  • सरकारी वित्त पोषण – कर्मचारियों से कोई योगदान नहीं लिया जाता था; पूरा खर्च सरकार उठाती थी।
  • महंगाई भत्ता (DA) समायोजन – पेंशनभोगियों को महंगाई को देखते हुए DA में वृद्धि का लाभ मिलता था।
  • पूरी तरह कर-मुक्त – पेंशन की संपूर्ण राशि आयकर से मुक्त थी।

OPS से जुड़ी समस्याएँ:

  • यह सरकार के लिए वित्तीय रूप से अस्थिर मानी जाती थी, क्योंकि पेंशन का बोझ लगातार बढ़ रहा था।
  • इसमें निवेश या फंड निर्माण नहीं होता था, जिससे सरकार को सीधे अपने बजट से पेंशन का भुगतान करना पड़ता था।
  • कई राज्यों ने OPS की वापसी की मांग की है, यह तर्क देते हुए कि यह सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए अधिक सुरक्षित है।

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) – बाजार आधारित मॉडल

2004 में, सरकार ने OPS को बंद कर NPS की शुरुआत की, जो एक टिकाऊ और बाजार-आधारित प्रणाली है। NPS एक योगदान आधारित योजना है, जिसमें कर्मचारी और सरकार दोनों पेंशन फंड में निवेश करते हैं।

NPS की मुख्य विशेषताएँ:

  • योगदान प्रणाली – कर्मचारी अपने वेतन (बेसिक + DA) का 10% योगदान देते हैं, जबकि सरकार 14% योगदान देती है।
  • बाजार आधारित रिटर्न – पेंशन फंड सरकारी बॉन्ड, इक्विटी, और कॉर्पोरेट बॉन्ड में निवेश किया जाता है।
  • आंशिक एकमुश्त निकासी – सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी 60% राशि टैक्स-फ्री निकाल सकते हैं, जबकि 40% अनिवार्य रूप से वार्षिकी खरीदने के लिए प्रयोग किया जाता है।
  • पोर्टेबल अकाउंट – कर्मचारी नौकरी बदलने पर भी अपना पेंशन खाता जारी रख सकते हैं।

NPS से जुड़ी समस्याएँ:

  • गारंटीड पेंशन नहीं – यह योजना पूरी तरह से बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करती है।
  • महंगाई से सुरक्षा नहीं – OPS में DA बढ़ने से पेंशन बढ़ती थी, लेकिन NPS में ऐसा कोई लाभ नहीं है।
  • वार्षिकी पर कर लागू – पेंशन फंड से खरीदी गई वार्षिकी पर टैक्स लगता है।

अधिक जानकारी के लिए, देखें: pfrda.org.in

एकीकृत पेंशन योजना (UPS) – मध्य मार्ग

1 अप्रैल 2025 से लागू होने वाली, एकीकृत पेंशन योजना (UPS) OPS और NPS के फायदों को मिलाकर बनाई गई है। इसका उद्देश्य वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना और साथ ही सरकारी वित्तीय स्थिरता को बनाए रखना है।

UPS की मुख्य विशेषताएँ:

  • गारंटीड पेंशन – 25+ वर्षों की सेवा वाले कर्मचारियों को उनके पिछले 12 महीनों के औसत वेतन का 50% पेंशन के रूप में मिलेगा। 10 से 25 वर्षों की सेवा वाले कर्मचारियों को अनुपातिक पेंशन मिलेगी।
  • संकर (Hybrid) योगदान प्रणाली – कर्मचारी 10% योगदान देंगे, जबकि सरकार 18.5% योगदान देगी (NPS से अधिक)।
  • महंगाई सुरक्षा – इसमें DA आधारित समायोजन का प्रावधान है, जिससे महंगाई का असर कम होगा।
  • पारिवारिक पेंशन – यदि पेंशनधारी की मृत्यु हो जाती है, तो परिवार को 60% पेंशन मिलेगी।

UPS से जुड़ी संभावित चिंताएँ:

  • वित्तीय बोझ – सरकार को अधिक खर्च वहन करना होगा, जिससे इसकी दीर्घकालिक स्थिरता पर सवाल उठ सकते हैं।
  • कर नीतियाँ स्पष्ट नहीं – अभी तक UPS पर कर व्यवस्था को स्पष्ट नहीं किया गया है।
  • राज्य सरकार के कर्मचारियों की स्थिति स्पष्ट नहीं – UPS में राज्य कर्मचारी शामिल होंगे या नहीं, इस पर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

अधिक जानकारी के लिए, देखें: financialservices.gov.in

Old vs New Pension Scheme 2025

OPS बनाम NPS बनाम UPS – त्वरित तुलना

विशेषतापुरानी पेंशन योजना (OPS)राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS)एकीकृत पेंशन योजना (UPS)
प्रकृतिनिश्चित लाभ (गारंटीड)योगदान आधारित (बाजार-निर्भर)संकर (गारंटीड + योगदान)
कर्मचारी योगदानकोई नहीं10% वेतन10% वेतन
सरकारी योगदानपूर्ण वित्त पोषित14% वेतन18.5% वेतन
गारंटीड पेंशनहांनहींहां
महंगाई सुरक्षाहां (DA समायोजन)नहींहां (महंगाई समायोजित)
एकमुश्त निकासीलागू नहीं60% निकासीअभी तक पुष्टि नहीं
कर प्रावधानपूरी तरह कर-मुक्तआंशिक रूप से कर योग्यअभी तक पुष्टि नहीं
उपलब्धता2004 से पहले के सरकारी कर्मचारी2004 के बाद सरकारी कर्मचारी व अन्यसरकारी कर्मचारी (विवरण लंबित)

भविष्य की संभावनाएँ और प्रभाव

एकीकृत पेंशन योजना (UPS), OPS और NPS की चिंताओं को संतुलित करने का प्रयास है। हालांकि, इसका सरकार की वित्तीय स्थिति पर प्रभाव महत्वपूर्ण रहेगा।

सरकारी कर्मचारियों के लिए:

  • 2004 से पहले नियुक्त कर्मचारी OPS में बने रहेंगे।
  • 2004-2025 के बीच NPS में शामिल कर्मचारियों को UPS चुनने का विकल्प मिलेगा या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।
  • 2025 के बाद नियुक्त कर्मचारी अनिवार्य रूप से UPS में शामिल होंगे।

सरकार के लिए:

  • वित्तीय संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी
  • भविष्य में पेंशन भुगतान का बोझ अधिक न बढ़े, इसका ध्यान रखना आवश्यक होगा।

निष्कर्ष

भारत में पेंशन प्रणाली पर बहस अभी खत्म नहीं हुई है। OPS ने सुरक्षा दी, लेकिन वित्तीय रूप से अस्थिर थी। NPS ने स्थिरता लाई, लेकिन गारंटीड लाभ नहीं दिए। UPS इन दोनों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है।

अब सवाल यह है कि क्या UPS वित्तीय सुरक्षा और स्थिरता के बीच सही संतुलन बना पाएगा? इसका उत्तर आने वाले समय में मिलेगा।

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